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दो घोड़े! two horses – short hindi motivation story

दो घोड़े – Two Horses Story

ये कहानी है दो घोड़ो (two horses) की… बहुत पुरानी बात है जब रामनगर में एक व्यापारी रहा करता था। जिसका नाम था श्यामसुंदर। श्यामसुंदर को किसी बात की कोई कमी नहीं थी। वो अपने जीवन में बहुत सुखी था और उसने अपने तबेले में दो सफ़ेद और चमकीले घोड़े पाल रखे थे। उसे उन घोड़ो से बड़ा लगाव था।

do ghode two horses hindi story

Two horses

श्यामसुंदर अपने दोनों घोड़ो को बहुत लाड़ – प्यार करता था। उन दो घोड़ो को कभी किसी भी बात की कमी नही होती थी। और वो दोनों घोड़े दूर से दिखने में एकदम जुड़वे लगते थे। कोई भी दूर से उन दोनों के फर्क को पहचान नही पाता था।

श्यामसुंदर ने अपने एक घोड़े का नाम समर और दूसरे घोड़े का नाम अमर रखा था। और दोनों ही दिखने में एक दम राजा विक्रमादित्य के घोड़े की तरह सुंदर दिखाई पड़ते थे पर उन दो घोड़ो में से अमर नाम का घोडा अंधा था। ये बात श्यामसुंदर को अच्छी तरह पता थी। फिर भी श्यामसुंदर अपने घोड़ो को जान से ज्यादा चाहता था और दोनों में कोई भेदभाव नहीं करता था।

समर और अमर दोनों सुंदर दिखने के साथ साथ बहुत cleaver भी थे, वे दोनों कभी भी आपस में नहीं लड़ते थे और हमेशा साथ साथ रहते, घूमते – फिरते, और वो इतने शिस्तप्रिय थे की हर रोज श्यामसुंदर के बिना तबेले से निकलकर पहाड़ो की तरफ चरने के लिए जाते और शाम को अंधेरा होने से पहले साथ साथ वापस आते। और श्यामसुंदर उनकी इस होशियारी से बहुत प्रभावित था इसीलिए उसने उस तबेले पर कोई दरवाजा नहीं लगाया था और न ही वो समर और अमर को रस्सी से बांधकर रखता था। क्यू की उसे उन दोनों पर पूरा विश्वास था।

श्यामसुंदर ने अपने दिखाई देने वाले घोड़े (समर) के गले में एक घंटी बाँध रखी थी जिससे जब समर और अमर (अंधा घोडा) दोनों साथ साथ चारा खाने जाते तो अमर समर के गले में बंधी घंटी की आवाज पहचान लेता और उसकी तरफ आ जाता। और फिर ऐसे ही शाम को दोनों तबेले की ओर आ जाते। और समर भी रस्ते में चलते चलते बीच बीच में अपने अंधे दोस्त अमर को देखता रहता की कही वो पीछे तो नहीं रह गया या उसे कोई चोट तो नही आयी।

और अगर समर को लगता कि अमर पीछे छूट गया है तो वो भी फिरसे पीछे चला जाता या अपनेे सिर को जोर जोर से हिलाकर गले में बंधी घंटी को बजाता जिससे अमर को समर की दिशा मालूम होती और वे दोनों साथ मिलकर घर के लिए रवाना होते।

Moral of two horses story – दो घोड़े कहानी का तात्पर्य

दोस्तों आपने देखा की कैसे समर अपने अंधे दोस्त अमर की मदद करता था और उसे भी अपने साथ लेकर चलता था। और कभी अमर पीछे छूट जाये तो समर खुद पीछे चला जाता और अमर को अपने साथ लेकर आता।

अगर हम इंसानों को इन दो घोड़ो (two horses) की जगह पर रख दे। और इन घोड़ो के मालिक श्यामसुंदर को भगवान माने तो हमें अपने जीवन का असली लक्ष समझ आएगा।

मतलब भगवान किसी भी इंसान को ज्यादा या किसी को कम प्यार नहीं करता या किसी में भेद नही करता। वो बस कभी हमें समर बना देता है ताकी हम दूसरे कठिनाइयों में फसे लोगो की मदद कर सके। और कभी हमारे लिए किसी और को समर बना देता है जिसकी मदद से हम अपने संकटो से बाहर आ सके

इसलिए दोस्तों, अगर आप चाहते है कि जब आप अमर हो तो कोई समर बनकर आपकी मदद करने आये तो पहले आप खुद को समर बनाइये और दूसरों की मदद करिए। 🙂

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