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अंडा,आलू और कॉफ़ी के बीज की कहानी – जीवन आसान हैं

दोस्तों ये कहानी है एक आलू, अंडे और कॉफ़ी के बीज की… इस कहानी को पढकर आप निश्चित रूप से ये जानने वाले है की इंसानी जीवन जीना बहुत आसान है पर हम उसे यू ही कठीन बनाते है जब की वो बहुत सरल है। तो चलिए बढ़ते है हमारी कहानी अंडा, आलू और कॉफ़ी के बीज की तरफ।

Anda, Aalu aur coffe ke beej ki kahani jeevan aasan hai

अंडा, आलू और कॉफ़ी के बीज

अंडा, आलू और कॉफ़ी का बीज – जिंदगी आसान है/ The Story Of A Egg, Potato And Coffee Beans – life is easy


एक गाव में रामलाल नाम का बड़ा श्रीमंत और दयालु व्यक्ति रहा करता था जिसका एक ही बेटा था जिसका नाम राहुल था। राहुल अपने पिता के स्वभाव से बिल्कुल उल्टा था। और ये बात रामलाल बड़े अच्छे तरीके से जानता था। राहुल को पढाई लिखाई में भी कोई दिलचस्पी नहीं थी। रामलाल उसे बहुत समझाता की बेटा पढाई करो पर राहुल को लगता था उसके पिता के पास इतना सब कुछ है तो क्यू वो फालतू में पढाई करें और इसीलए वो स्कूल भी नही जाता।

ऐसे ही कुछ सालो बात जब राहुल ने स्कूल छोड़ दिया और रामलाल थोडा बूढ़ा होने के कारण उसने अपनी संपत्ति और धन-दौलत अपने बेटे के नाम करने की सोची। पर वो जानता था की उसका बेटा ये सब नहीं संभाल पायेगा और इसीलए रामलाल ने राहुल को सबक सिखाने की ठान ली।

रामलाल ने अगले ही दिन अपना सारा कारोबार राहुल पर सौप दिया। और दिन भर घर पर आराम करने लगा। राहुल को ये पहले बहुत अच्छा लगा और वो तेजी से सब काम करने के विचार से निकल पड़ा। और होना क्या था, दो दिन बाद राहुल रामलाल के पास आया और बोला की में ये सब नहीं संभाल सकता अभी ये सब आप ही देखों।

रामलाल शांति से बैठा था। और बिना कुछ कहे अपने बेटे की तरफ देख रहा था और राहुल अपने दुःख दर्द सुनाये ही जा रहा था। बोलते बोलते राहुल ने कहा की जिंदगी जीना बहुत मुश्किल है। इसमें बहुत ज्यादा संकट आते रहते है जिन्हें कोई नहीं झेल सकता। बस ये दो लाइने सुन कर तो रामलाल का पारा ही चढ़ गया।

रामलाल ने राहुल की तरफ गुस्से से देखा और कुछ भी न कहते हुए उसका हाथ पकड़ कर उसे किचन में ले गया। राहुल को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की उसके पिता ऐसा क्यू कर रहे है।

रामलाल ने किचन में पहुचकर अपने बेटे राहुल का हाथ जोर से झटका और समान आकर के तीन मटके लिए, हर एक मटके में समान मात्रा में पानी डाला! और अलग अलग गैस जलाकर उसपर ये तीन मटके रख दिए।

पहले मटके में उसने एक आलू डाला। दूसरे में एक अंडा डाला और तीसरे मटके में कुछ कॉफ़ी बीन्स (कॉफ़ी के बीज) डाले और हाथ पर हाथ रखकर इंतज़ार करने लगा।

वही पास खड़ा राहुल ये सब देख रहा था और उसे जरा सी भी कल्पना नहीं थी की क्या चल रहा है या क्या होने वाला है।

जैसे ही बीस मिनट हो गये… रामलाल ने तीनो गैस बत्तिया बुझा दी और वो बर्तन (मटकिया) गैस से निचे उतार ली। और दो छोटे छोटे बाउल्स और 1 टी कप लेकर पहली मटकी से आलू निकाला और पहले बाउल में रख दिया। फिर दूसरी मटकी से अंडा निकालकर दूसरे बाउल में डाल दिया और अंत में तीसरे मटकी से जिसमे कॉफ़ी का बीज पूरी तरह से घुल गया था उसमे से थोडा द्रव्य निकालकर टी कप में डाल दिया। और राहुल की तरफ देखने लगा।

थोड़ी देर बाद रामलाल ने राहुल को आलू को छुने के लिए कहा! राहुल ने आलु को टच किया तो उसकी उंगली आलू में चली गई। फिर रामलाल ने अंडा ठंडा होने पर दूसरा बाउल आगे किया और अंडा उठाकर राहुल के हाथ में दे दिया और उसे उस अंडे को पूरी ताकत लगाकर फोड़ने को कहा। राहुल ने दोनों हाथो से उस अंडे को जोर से दबाया और तोड़ने की कोशिश की पर अंडा नही टुटा। फिर रामलाल ने राहुल के हाथ से अंडा लेकर बाउल में रख दिया और टी कप उठाकर राहुल को एक घूंट वो (कॉफ़ी के बीज से बना) द्रव्य पिने को बोला। राहुल ने वो पिया तो उसे उसका स्वाद बड़ा अच्छा लगा।

फिर रामलाल ने राहुल से एक सवाल पूछा की इससे तुम्हे क्या समझ में आया?

राहुल अपना सर खुजाने लगा तो रामलाल बोला, मेने अंडा, आलू और कॉफ़ी के बीज (coffee seeds) को  समान मात्रा के पानी में और सामान उष्णता पर उबाला था। फिर भी आलू जो की पहले बहुत कठोर था वो उबलने के बाद एकदम नरम और कमजोर हो गया। और अंडा जो की पहले बहुत नाजुक था और आसानी से तोडा जा सकता था। एक कोमल कवच के अंदर बा कुछ लिक्विड था जो की उबलने के बाद इतना कठोर और सख्त बन गया की उसको दोनों हाथो से तोड़ना भी मुश्किल हो गया।

वही उबलने से पहले जो कॉफ़ी का बीज था वो उबलते वक़्त पूरी तरह पानी में घुल गया और उससे एक अलग और स्वादिष्ट द्रव्य बना।

दोस्तों, हमारा जीवन भी बिल्कुल ऐसा ही होता है। सब के जीवन में कठिनाईया और संकट तो आते ही है पर आप अपने जीवन को संकट आने पर अंडे की तरह बनाकर कठोर बनते हो या आलू की तरह पहले कठोर रहकर संकट आने पर कमजोर पड जाते हो। या इन दोनों से अलग मतलब कॉफ़ी के बीज की तरह अपने जीवन के संकट को सुवर्ण संधी मान कर अपने आप को समर्पित करके काम करते हो और आखिर में स्वादिष्ट और दुनिया से परे बनते हो ये मायने रखता है।

इसीलिए कहता हू जिंदगी आसान है बस आपको deside करना है की आपको अपनी जिंदगी अंडे या आलू की तरह बनानी है या कॉफ़ी के बीज की तरह….

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