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हाथी और रस्सी की कहानी! कैसे हमारी सोच हमें आगे बढ़ने नही देती

नमस्कार दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी बताने जा रहा हु जो कहानी कम और हम सब के जीवन की हकीकत ज्यादा है। और उस कहानी का नाम है हाथी और रस्सी की कहानी! जी हाँ, the story of elephant and rope in hindi.

The story of elephant and rope

हाथी और रस्सी

इस कहानी को पढ़कर आपको भी ये यकीन हो जायेगा की आखिर हर इंसान successful क्यूँ नही बन पाता! और हमारी नकारात्मक सोच का हमारे प्रगति पर कैसे बुरा असर पड़ता है और कैसे हमारी सोच हमें आगे बढ़ने नही देती।

अगर आप इस कहानी को अच्छी तरह से समझ कर उसपर अमल करते हो तो में आपको आज ही कोरे कागज पर लिखकर दे सकता हूँ की आप 100% सफल हो जाओगे। तो चाहिए बढते है हमारे हाथी और रस्सी की कहानी की तरफ…

हाथी और रस्सी की कहानी / Story of Elephant and Rope in hindi


एक बार एक गाँव में बहुत बड़ा मेला लगा था। जिसमें एक बूढे व्यक्ति (बाबा) हाथी लेकर आये थे जिसपर बहुत सारे लोग सवारी करते और उसके बदले में उस बाबा को पैसे देते थे। ऐसे ही 2-3 दिन रोज वो बाबा उस हाथी को मेले में ले जाते और दिन भर लोगो को उस हाथी की सवारी कराते जिसके बदले में उन्हें खूब पैसे मिलते और रात को जब मेला बंद हो जाता था तब वो एक खाली मकान जो की किराये पर लिया गया था उसके बाहर अपने हाथी को एक छोटीसी और पतली रस्सी से बांध देते! और अंदर जाकर चैन से सो जाते थे।

बाबा का ये नित्य क्रम हो गया था जो की उस किराये के घर के पास रहने वाला रामू हर रोज देखता था। और मन ही मन ये बात सोचता रहता की ये हाथी इतना विशाल है और बाबा इसे इतनी पतली रस्सी से बांधकर चैन की नींद कैसे सो जाते है। क्यू की हाथी चाहे तो सिर्फ एक झटका देकर ऐसी 100 रस्सियों को एक साथ तोड़ सकता था। रामू हर रोज इसी बात को लेकर चिंतित रहता था की कही वो हाथी रस्सी तोड़कर भाग न जाये… अगर हाथी भाग गया तो उस बूढ़े बाबा का क्या होगा? जब की बाबा आराम से सो जाते थे।

दो दिन बाद रामू से रहा नहीं गया और उसने बाबा को इस बारे में पूछने का सोचा.. और उनका इंतजार करने लगा! उसका कही और मन नही लग रहा था बस उसके दिमाग में यही हाथी की बात घूम रही थी। जब शाम को बाबा हाथी को लेकर किराये के मकान की तरफ लौटे तब रामू ने उन्हें जाते देखकर आवाज लगाई और जोर से उनकी तरफ दौड़ पड़ा…

रामू जब बाबा के पास पहुँचा तब बाबा ने उसको शांति से देखा और बोले की क्या बात है भाई? तुम इतने परेशान से क्यू लग रहे हों। बाबा की इस बात पर रामू तेजी से सांस लेते लेते बोला की बाबा मुझे एक सवाल सता रहा है जिसका जवाब सिर्फ आप ही दे सकते है। बाबा बोले, अगर ऐसी बात है तो जल्दी से पूछो, क्यू की मेरी वजह से किसीकी परेशानी कम हो जायेगी इससे बड़ी ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है इस बूढे के लिए!

जैसे ही बाबा की बात खत्म हुई, रामू बोला की बाबा मेने बहुत सोचा पर ये नहीं जान पाया की आप इस हाथी के पैर को इतनी कमजोर और पतली रस्सी से बांधकर कैसे आराम करने चले जाते हों, मतलब ये हाथी इतना महाकाय और शक्तिशाली है की ऐसी सौ से 150 रस्सियां आराम से तोड़कर यहाँ से भाग सकें और अगर ये हाथी भाग गया तो आपके खाने पिने का बंदोबस्त कैसे होगा? इसकी आपको जरा भी फ़िक्र नहीं है?

रामू का ये सवाल सुनते ही बाबा जोर जोर से हसने लगें.. रामू को कुछ भी समझ नही आ रहा था की बाबा ऐसा क्यू कर रहे है! आखिर उसकी शंका का निरसन करने के लिए बाबा अपनी हँसी रोकते हुए बोले की, तुम जो कह रहे हो ऐसा होना नामुमकिन है! ये हाथी नही भागेगा।

बाबा का उत्तर सुनकर तो रामु और भी दुविधा में पड गया… और उसने अपना सर खुजाते हुए कहा की आप इतना पक्का कैसे कह सकते हो की ये हाथी नही भागेगा।

बाबा एकदम शांति से बोले देखो बेटा, इसमे वो ताकद है की वो ऐसी हजारो रस्सियां तोड़ सकें पर ये वो बात नही जानता। दरसल ये हाथी जब छोटासा बच्चा था तब भी हम इसको इसी रस्सी से बांधा करते थे और वो तब इस रस्सी को तोड़कर आझाद होने के लिए बहुत कोशिश करता था। पर तब वो छोटा होने के कारन उसमे उतनी ताकत नहीं थी की वो रस्सी तोड़ पाता। और जैसे जैसे वो बड़ा होता गया वैसे वैसे उसकी ताकत तो बढ़ रही थी पर उसने कोशिश करना ही छोड़ दिया! और आज उसके पास इतनी ताकत है की वो रस्सी तो क्या बड़े से बड़ी दिवार तक तोड़ सकता है पर उसके मन में ये बात बैठ गयी है की वो इस रस्सी को नही तोड़ सकता और इसीलिए वो इसको तोड़ने का प्रयास भी नही कर रहा।

दोस्तों हम इंसान भी बिल्कुल इस हाथी की तरह ही है। पहले पहले हम कुछ करने की कोशिश करते है और जब हम उसमे नए होते है तब अक्सर हम fail हो जाते है। और एक दो बार fail हो जाने के बाद हमारे अंदर उस काम को करने की क्षमता आ जाती है पर ये हमें पता नहीं चलता और हम इस हाथी की तरह कभी कोशिश ही नही करते।

  अगर कोई बोलता है की ये करना बहूत मुश्किल है तो हम भी वैसा ही सोचने लगते है और फिर कुछ दिन बाद हमें वो मुश्किल से नामुमकिन लगने लगता है। मेरा ये मानना है की कोई भी काम आसान या मुश्किल नही होता, हमारे मन के विचार उसको आसान या मुश्किल बनाते है।


मेरे खयाल से आप अब समझ चुके होंगे की हमारी नकारात्मक सोच कैसे हमें आगे बढ़ने नही देती। इसीलिए हमेशा अपनी सोच positive रखे और आगे बढ़ते चले जाएं

तो मित्रो मेरा आप से निवेदन है किसीके बातो में ना आकर अपना लक्ष्य बनाये रखें और आप चाहे जिस क्षेत्र में काम कर रहे हो वो काम मन लगाकर करे और आपको सफलता न मिले तो भी हार ना मान कर फिरसे कोशिश करे और तब तक कोशिश करते रहे जब तक आप उस काम में सफल नहीं हो जाते।

अगर आपको ये कहानी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर share करे और अगर आपके पास भी कोई ऐसी कहानी है जिसे आपको हमसे शेयर करना है तो आप हमें contactsuccessveda@gmail.com पर ईमेल कर सकते है। अगर हमें वो कहानी अच्छी लगी तो हम उसे आपके नाम और फ़ोटो के साथ यहाँ पर publish करेंगे। धन्यवाद!

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