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निःस्वार्थ भाव से किया गया काम और उसका फल Best Motivational Story

निःस्वार्थ भाव से किया गया काम और उसका फल

Best Short Motivational Story In Hindi

 

Motivational story

निस्वार्थ भाव से किया गया काम

रामपुर नामक गाँव में मनोज नाम का एक पेंटर रहता था।उसकी पेंटिंग दिल को मोह लेने वाली होती थी।अगर कोई उसके painting को एक बार देखता तो वह देखते ही रह जाता। उसके पेंटिंग के चर्चे बहुत दूर दूर तक होते थे।

 

एक बार की बात है,पड़ोस के शहर से नाव पेंट करने का एक आर्डर मनोज को मिला।मनोज नियत समय पर नाव को पेंट करने पहुँच गया।नाव पेंट करते वक़्त मनोज ने देखा की नाव में एक छोटा सा छेद है,और उसने नाव को पूरा पेंट करने के बाद उस छेद को भी repair कर दिया,और काम समाप्त होने पर वह वापस घर लौट आया।

 

अगले दिन सुबह मनोज देखता है कि राघव जिसका कल वह नाव पेंट करके आया था,हाथ में मिठाई का डिब्बा लिए बहुत ही खुशी में जल्दी-जल्दी चला आ रहा है।

 

राघव ने पास आकर मिठाई का डिब्बा और 1000 डॉलर मनोज को दे दिया।मनोज ने पैसा गिनने के बाद आश्चयचकित होते हुए बोला, साहब  हमारी बात तो 100 डॉलर की हुई थी आप मुझे एक हजार डॉलर क्यों दे रहे है ?

 

राघव ने अपने आँखों की तरफ इसारा करते हुये बोला ,ये मेरे आँखों के आंसू देख रहे हो ना,ये आंसू ख़ुशी के हैं।कल मेरे साथ कुछ ऐसा घटित हुआ जिसके लिये मैं तुम्हे एक हज़ार डॉलर क्या एक लाख डॉलर भी दे दू फिर भी वह कम ही होगा।मैं तुम्हारा धन्यवाद कैसे अदा करूँ मैं नहीं समझ पा रहा हूँ।

 

मनोज बहुत ही आश्चर्यचकित होते हुये पूछा,आखिर ऐसा क्या हुआ कृपया बतायें।

इस पर राघव ने कहा कि कल नाव पेंट करने के बाद नाव में एक छेद था उसे भी रिपेयर किये थे ना।मनोज बोला हा मैं उस छेद को रिपेयर किया था पर हुआ क्या?

 

राघव बोला की मुझे पता था की नाव में छेद है पर मेरे घर वालों को नाव के छेद के बारे में कुछ भी नहीं पता था।और कल मेरे घर वाले बिना मुझे बताये ही नाव को लेकर घुमने चले गए थे।

 

जब मुझे इस घटना के बारे में पता चला तो मैं एकदम sure हो चूका था की अब नहीं तो नाव वापस आने वाला है और ना ही मेरे घर वाले।लेकिन जब मैं शाम को नाव को वापस आते देखा तो मैं एकदम आवक रह गया कि यह चमत्कार कैसे हो गया।मैं एक तरफ अपने परिवार के सकुशल वापस लौट आने पर बहुत खुश था तो दूसरी तरफ छेद के बारे में सोच रहा था।

 

फिर जब मैंने नाव को examine किया तो पाया कि छेद को तो पहले से ही repair किया जा चूका है।मैं समझ गया की नाव की repairing जरूर तुम्हारे द्वारा ही किया गया होगा, इसलिये मैं इतना सुबह ही तुमसे मिलने और धन्यवाद देने के लिए खुद को रोक नही पाया ।

राघव और मनोज दोनों के आँखों से अब ख़ुशी की अविरल धारा बह रही थी।

 

 

दोस्तों हमारे द्वारा किया गया निःस्वार्थ भाव से कोई काम किसी के लिए कितना लाभदायक हो सकता है हम इसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते है।निःस्वार्थ भाव से कोई काम करके देखिये मैं वादा करता हूँ आपको कुछ मिले ना मिले self satisfaction जरूर मिलेगा।

 

 

आपको यह short motivational story निःस्वार्थ भाव से किया गया काम और उसका फल कैसा लगा हमें comment के माध्यम से जरूर सूचित करें।आप इस मोटिवेशनल कहानी को अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें।

 

धन्यवाद् ☺
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