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समस्या ही संधि होती है – shake off your problems

नमस्कार दोस्तों आज में आपको एक ऐसी कहानी बताने वाला हु जिसे पढ़कर आप भी अपने सारे प्रोब्लेम्स को एक सुवर्ण संधि के रूप में देखना शुरू कर देंगे ये मेरा दावा है। और हमारे आज के कहानी का नाम है – समस्या ही संधि होती है – shake off your problems

 

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Shake off problems story in hindi

 

समस्या ही संधी होती है – shake off your problems hindi story

एक बार एक गांव में एक आदमी रहता था। जिसके पास एक गधा था। और वो आदमी रोज उस गधे के ऊपर अपना कुछ न कुछ सामान लादकर बाजार जाकर बेच आता। जैसे कपास, समुद्र किनारे से निकाला गया नमक तो कभी अपने खेत में उगाई फसल के दाने…

वो आदमी उस गधे के काम से बेहत खुश था और गधा भी अपने मालिक से भरपेट चारा मिलाने के कारण खुश रहता था। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। गधा और मालिक दोनों एक दूसरे के काम से बड़े खुश थे।

एक दिन जब हर रोज की तरह मालिक गधे पर बोझ लादकर बाजार जा रहा था तभी रस्ते में एक बड़ा गढ्डा खुदा हुआ था। शायद सड़क के पास किसी बड़े कंपनी का काम चल रहा था। इसीलिए इमारत का पाया बनाने के लिए रास्ता हटाकर वहां गड्डा लिया जा रहा था। और सभी कामगार वर्ग आराम करने हेतु वहां से दूर छाव वाली जगह पर चले गए थे। और मालिक गधे को लेकर वहां से गुजर रहा था।

वो आदमी को पहले ही बाजार जाने के लिए देरी हो चुकी थी इसीलिए वो तेजी से चल रहा था और गधा भी उसके गले में लटकी रस्सी को देखते तेजी से भाग रहा था ताकि वो रस्सी ढीली रहे और उसके गर्दन को चुभे ना।

थोड़ी देर में वो गड्डा सामने आया फिर भी मालिक चले जा रहा था और चलते चलते उसने आसानी से उस गड्डे के ऊपर से ये सोचकर छलांग लगाई की गधा भी आराम से छलांग लगा सकता है पर वो आदमी ये भूल गया कि गधे के पीठ पर इतना सारा बोझ है जिसे लेकर वो बिल्कुल भी छलांग नही मार सकता।

जैसे ही उस आदमी ने छलांग लगाई और गड्ढे के उस पार चला गया गधा भी रस्सी को देखते छलांग लगाने गया और सामने गड्ढे में जाकर गिर गया।

धप से आवाज आने पर उस आदमी ने पीछे मुड़कर देखा तो गधा वहां नही था और गड्ढे से गधे की चीखने की आवाज आ रही थी। वो आदमी भागते हुए गड्ढे की तरफ आया और गधे को निकालने की तरकीब सोचने लगा। पर गड्डा इतना गहरा था कि गधे का निकलना नामुमकिन सा लग रहा था।

उस गधे में मालिक ने अपने कुछ साथियों को बुलाया और गधे को बहार निकालने की कोशिश की। पर कोई फायदा नही हुआ। थोड़ी देर बाद वहां उस कंपनी के कामगार आ गए और गड्ढे को मिट्टी से ढकने की तैयारी करने लगे। उस आदमी ने उनसे पूछा की गड्डा क्यू बुझा रहे हो? उस पर एक कामगार ने खुलासा किया कि कोर्ट ने ये जमीन कानून  की है और यहाँ पर कोई ईमारत नही बनेगी ऐसा निर्णय सुनाया है और 24 घंटे में ये गड्ढे भरकर फिरसे पहले जैसा रास्ता बनाने के लिए कहा है। पर जब उसमे गधा गिर गया है ये बात उन कामगारों को पता चली तो वो भी उस गधे को बाहर निकालने लग गए पर उनकी भी कोशिश बेकार चली गयी। गधा भी बाहर आने की बहुत कोशिश कर रहा था पर वो चाहकर भी उस गड्ढे से बाहर नही निकल पा रहा था।

आखिर सब कामगारों और गधे के मालिक ने उस गधे को उसी गड्ढे में जिन्दा दफना देने का निर्णय लिया। और सब कामगार उस गड्ढे में रेती (मिट्टी) धकेलने लगे। गधा जोर जोर से चिल्ला रहा था। उसे पता था कि अब वो जिन्दा बचने वाला नही था। और वो अपने कुछ आखिरी पल जी रहा था।

जैसे ही ऊपर से गधे के शरीर पर मिट्टी गिरने लगी तो गधा उस मिट्टी के भार को कम करने के लिए उस मिट्टी को शरीर से shake करके उसके ऊपर चढ़ जाता। फिर थोड़ी मिट्टी आने पर वो फिर उसको झटक देता और 1 स्टेप मिट्टी के ऊपर आ जाता।

ऐसा करते करते गड्डा आधा भर गया और गधा अब भी ऐसे ही मिट्टी झटकता और उस मिट्टी में फसे पांव को ऊपर निकालता रहा था। और देखते ही देखते वो छलांग लगाकर गड्ढे से बाहर आ जाता है।

दोस्तों, इस गधे और मालिक की motivational story (shake off your problems) से हमें ये समझ आता है कि समस्या ही संधि होती है। और हमें अपनी समस्या को ध्यान से देखना चाहिए जिससे उसी में हमे हल मिल जाता है।

 

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