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Thomas Edison – गलतियों से सीखिए (थॉमस के विचार)

नमस्कार दोस्तों, आज सुबह ऐसे ही इंटरनेट पर सर्फिंग करते करते मेरी नजर thomas edison के पर लिखे एक इंग्लिश लेख पर पड़ी। जिसमे से मुझे एक बात बहूत अच्छी लगी जो आज में विस्तार से आपके साथ शेयर करने जा रहा हूँ। अब वो बात कोनसी है इसका अंदाजा आप इस लेख के शीर्षक से ही लगा सकते है। जी हां… में thomas edison की एक बात learn from mistakes (गलतियों से सीखिए) के बारे में बात कर रहा हु।

Thomas edison-learn-from-mistakes

थॉमस एडिसन

आप ये तो जानते ही होंगे की थॉमस एडिसन कौन है। और ये भी जानते होंगे की उनके द्वारा किये गए अविष्कार की वजह से ही आज हम सब इस युग में ऐशोआराम से रह पा रहे है। और वो अविष्कार है बल्ब। बिल्कुल सही पढ़ा आपने.. थॉमस एडिसन ने बड़ी मेहनत करके विज्ञानं को एक नया रूप देकर बल्ब का आविष्कार किया जिसकी वजह से आज हम सब आराम से पढ़ पा रहे है, रास्तो पर चल पा रहे है, घर में बेझिझक सब काम कर रहे है बिना अँधेरे में इधर उधर टकराये।

सोचिये अगर इस महान शख्स ने बल्ब बनाया ही नही होता तो? अगर वो भी ये सोचते की ऐसा कभी संभव नहीं है या हार मान जाते तो?

दोस्तों शायद आपको पता न हो लेकिन  मेरी नजर में thomas edison एक ऐसे positive सोच वाले इंसान है जो दो हजार बार फेल होकर भी अपनी सोच को सकारात्मक रखने की क्षमता रखते थे। और उनका हमेशा ये कहना था कि learn from mistakes मतलब अपनी गलतियों से सीखो। अब आप कहेंगे कि ऐसा क्यू? तो चलिए ये भी बता देता हूँ।

Thomas Edison – Learn From Mistakes in Hindi

ये thomas edison के जीवन का एक प्रसंग है जब वो बल्ब की खोज कर रहे थे पर बार बार असफल हो जाते थे। वो बहूत बार ट्राय करते पर हर बार फेल हो जाते। हर रोज वो बस यही नित्यक्रम अपनाते थे। आते, कोशिश करते और असफल हो जाते फिर दूसरे दिन भी यही।

ऐसे करते करते उन्हें बहूत दिन हो गए। पर दिन रात उनके दिमाग में एक ही बात घुमती रहती की उन्हें बल्ब बनाना है और इस दुनिया से अंधकार मिटाना है। उनका लक्ष्य बहूत मजबूत था। ऐसे प्रयास करते करते उन्हें पता भी नही चला की वो लगभग दो हजार बार अपने काम में असफल रहे है। क्यू की वो दो हजार ऐसे अलग अलग धातुओं पर बल्ब बनाने का प्रयोग कर चुके थे जिनसे बल्ब बिलकुल भी जल नहीं सकता था। फिर भी वो बिना किसी दुःख के बस फिरसे प्रयास करते।

Thomas edison तो ऐसे प्रयास करते रहते बिना असफलता या सफलता की फिकर किये। पर थॉमस एडिसन का जो assistant था वो इस रोज की गतिविधि से तंग आ चुका था। मतलब हर रोज एडिसन के साथ lab में आना और हर रोज नए नए धातुओं की बारीक़ तारे बनाकर बल्ब में उसे इस्तेमाल करके देखना की बल्ब जलता है या नही। पर इतने साल होने के बाद भी उन्हें बल्ब बनाने में सफलता नही मिल रही थी। और इसीलिए उनका असिस्टेंट इन सब कामो से ऊब सा गया था।

एक दिन अपनी सारी भड़ास निकालने के लिए असिस्टेंट ने thomas edison से अपने मन की बात बोल ही दी। हुआ यू, की जब एक दिन थॉमस और उनका PA बल्ब बनाने के लिए एक और नए धातु का प्रयोग कर रहे थे और उसमें भी वो असफल रहे तब उस दिन उनके असिस्टेंट को अपनी बाद पेट में रखना संभव नही हुआ और उसने thomas edison से कहा कि हम इतने दिन से कोशिश कर रहे है और हमने लगभग 2000 अलग अलग धातु पर प्रयोग करके देखा फिर भी एक से भी बल्ब नही जला। हमारा इतना वक़्त बेकार चला गया। हमें अब तक ये भी पता नहीं चला की बल्ब जलने के लिए कोनसा धातु सही है। बस हर रोज यहाँ आकर अलग धातु पर प्रयोग करके उसके results नोट करना और घर चले जाना यही हमारी जिंदगी हो गयी है। इससे न तो हम कुछ सिखने को मिल रहा है ना ही कोई काम हो रहा है।

अपने असिस्टेंट के इस बात को सुनकर थॉमस एडिसन एकदम शांत स्वाभाव से असिस्टेंट की तरफ देखने लगे और फिर एकदम धीमे और शांत स्वर में उन्होंने जवाब दिया जो कुछ निचे की तरह था –

आप गलत हो, आपने कहा कि हम इतने दिन से काम कर रहे है वो सब व्यर्थ हो गया और हम अब तक कुछ नही सिख पाये पर में कहता हूं कि हमने बहोत कुछ सीखा है। हमने 2000 ऐसे धातुओं के बारे में जान लिया है जिससे बल्ब बनाना असंभव है जो बात किसी और को नही पता। इससे बड़ा और क्या सीखना चाहिए।

Thomas Edison की ये बात सुनकर तो उनके असिस्टेंट का मुँह बिलकुल ही चुप हो गया। और वो थोडासा मुस्कुराकर फिरसे काम करने लगा।

देखा दोस्तों, एडिसन अपने जीवन में सिर्फ एक बल्ब की खोज करने के लिए इतनी मेहनत कर रहे थे और वो लगभग दो हजार बार नाकामयाब हुए थे फिर भी उन्होंने बिलकुल भी हिम्मत नही हारी और अपने गलतियों से सीखा। अगर वो तब ये कहते की जाने दो यार दो हजार धातुओं से बल्ब नही बना तो अब कुछ और धातुओं से क्या बनेगा या जलेगा। तो आज उनका इतना नाम नही होता और हम सब आज अँधेरे में होते।

हमें भी thomas edison की तरह की सोचना चाहिये जो की 2000 failure के बाद भी हिम्मत नही हारे थे और हम है कि किसी काम में एक या दो बार असफल होते ही उसे नामुमकिन समझ बैठते है। अगर आप सफल होना चाहते है तो प्रयास करते रहिए।

दोस्तों मेरा आप से एक ही कहना है की कोई काम करने से पहले हजार बार सोचो पर एक बार थान लेने के बाद सोचना बंद करके हजार बार उसको पूरा करने के लिए कोशिश करते रहो। और एक बात की दुनिया क्या सोचेगी ये आप कभी मत सोचना… दुनिया को जो सोचना है सोचने दीजिये क्यू की ये दुनिया तो भगवान को भी भला बुरा कहते है फिर हम तो इंसान है।

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